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रहिमन धागा मेत्रैयी का Rahiman dhaga maitri ka Neetu Singh Jadon

 रहिमन धागा मेत्रैयी का

रहिमन धागा मैत्री का मत तोड़ो चटकाय

टूटे से फिर ना जुड़े जुड़े गांठ पड़ जाए ।


अनुयाई ढूंढे जो वह मित्र कहां से पाए

कदम कदम जो साथ चले तो राह सुगम हो जाए

रहिमन धागा मैत्री का मत तोड़ो चटकाय ।


आप ही गूंथे , आप पकावे ,आप ही बैठा खाए

रहमान तृप्ति हुआ तू , दूजा भूखा रह जाए

रहिमन धागा मैत्री का मत तोड़ो चटकाय ।


आकर आकर प्रेम का जोड़ा , बैरी दिया बताय

स्वार्थी सत्य छुपाने को कीमत दी लगाय

रहिमन धागा मैत्री का मत तोड़ो चटकाय ।


अचरज है देख के दुनिया कैसा सूप सुभाए

मन की भर ली कटोरे में , निंदा दई उडाय

रहिमन धागा मैत्री का मत तोड़ो चटकाय ।


Roti रोटी Neetu Singh Jadon

 रोटी


एक गोल रोटी पड़ी पड़ी सुसता रही थी

कुत्ते को देख जोर जोर से चिल्ला रही थी ।


कुत्ते को भी सब्र करना पड़ा था

बीच में दोनों के एक छोटा लड़का जो खड़ा था ।


मायूस कुत्ते को आस ना तनिक थी

रोटी के साथ बटर की होने वाली पिकनिक थी ।


हाय आशाओं के गुब्बारे उड़ाने लगे थे

बधाओं के बादल जो छटने लगे थे ।


वह लड़का तू बसी बटर रोटी संग फेंकने आया था

जिसे देख बेचारा कुत्ता घबराया था ।


रोटी तू अन्नपूर्णा का आशीर्वाद है ‘तू महान है

भूख सबकी मिटाती ‘चाहे जानवर या अमीर गरीब इंसान है ।




मोबाइल, Mobile, नीतू सिंह जादौन, Neetu Singh Jadoun



( सच्चा दोस्त, बंदर सामुहिता,  प्रकृति,  आकांक्षा,  राष्ट्र , परोपकार,  चश्मा,  खुशी,  परिश्रम,  पक्षी, मगरमच्छ)

 

मोबाइल

मैं मोबाइल हूं जनाब मेरी हर बात निराली है

मुझसे लोगों की हथेली भरी और मुट्ठी खाली है।

 

2G 3G और 5G तक पहुंच गया हूं

पक्षियों के तो प्राणों को निकल गया हूं

मगरमच्छ की जकड़ है मेरी परोपकार में कंगाली है

मैं मोबाइल हूं जनाब मेरी हर बात निराली है।

 

बंदर बना कर नाच नचाता, सामूहिकता का पाठ पढ़ाता

राष्ट्र को जब चाहा तब जोड़ा और तोड़ दिया

जब भी एक पोस्ट ऐसी डाली है

 मैं मोबाइल हूं जनाब मेरी हर बात निराली है।

 

ईद दिवाली खुशी मनाता है ,अथक परिश्रम को जन-जन तक पहुंचाता

 प्रकृति न पूछो मेरी, मेरे चश्मे पर उन्मादों की लाली है

मैं मोबाइल हूं जबाब मेरी हर बात निराली है।

 

आकांक्षाओं को पर लगे, तकनीक से जीवन सरल हुआ है

सच्चा दोस्त,हर नाता, रिश्ता विरल हुआ है

 रुको, थोड़ा सोचो,  गर संस्कृति संभालनी है

 क्योंकि मैं मोबाइल हूं जनाब मेरी हर बात निराली है।

-:नीतू सिंह जादौन:-