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Roti रोटी Neetu Singh Jadon

 रोटी


एक गोल रोटी पड़ी पड़ी सुसता रही थी

कुत्ते को देख जोर जोर से चिल्ला रही थी ।


कुत्ते को भी सब्र करना पड़ा था

बीच में दोनों के एक छोटा लड़का जो खड़ा था ।


मायूस कुत्ते को आस ना तनिक थी

रोटी के साथ बटर की होने वाली पिकनिक थी ।


हाय आशाओं के गुब्बारे उड़ाने लगे थे

बधाओं के बादल जो छटने लगे थे ।


वह लड़का तू बसी बटर रोटी संग फेंकने आया था

जिसे देख बेचारा कुत्ता घबराया था ।


रोटी तू अन्नपूर्णा का आशीर्वाद है ‘तू महान है

भूख सबकी मिटाती ‘चाहे जानवर या अमीर गरीब इंसान है ।




जीवन के मोती


-:जीवन के मोती :-

 संभालो इस वक्त को, यह वक्त है वक्त का । 
 क्योंकि वक्त और वक्त के बीच, फासला बचा है वक्त का ।।

Pollution प्रदूषण


प्रदूषण, मानव, दानव, बेटा, विज्ञान, माँ, अग्रज


मेरे अनुसार मानव तथा साइंस पति-पत्नी है।  जिनके दो बेटे हैं, आविष्कार और प्रदूषण। यहां आविष्कार का मतलब उन सभी वस्तुओं से हैं, जिनका हम भोग करते हैं। उसके पीछे होने वाले एक्शन का रिएक्शन।  जिसे हम कभी-कभी प्रदूषण के नाम से भी जानते हैं। 

Pollution प्रदूषण 

दूर क्षैतीज पर
देख कुछ हलचल सी
मानव ललाट पर
उभर आई
गहन चिंता की रेखा

मानव
होश ही खो बैठा
जब सामने
विकराल रूप
दानव का देखा

मानव डर तो गया
पर पूछ लिया
कौन हो तुम ?
और काम क्या है यहां पर ?

हा ! हा ! हा !
क्या कहा?
तुम मुझे नहीं जानते
संपूर्ण धरती पर
साम्राज्य मेरा
फिर भी नहीं पहचानते

दूसरा बेटा हूं मैं
अपनी मां विज्ञान का
है, अग्रज सुख मेरा
पर बेटा विज्ञान का
मैं
एक्शन का रिएक्शन हूँ
प्रदुषण मेरा नाम है।
और दुःखी करना
मेरा काम है।

बाप देखे हैं, बहुत से
पर तुमसा देखा कहां !
क्रोध आता है, तुम पर
बेटो में भेदभाव देख यहाँ

तुम तो सदा ही
सुख को चाहते हो
पर अनदेखे के रूप में
मुझे भी पाते हो

मां ! अपने बच्चों में
अंतर कब आती है ?
अपने बच्चों को
सदा बराबर देना चाहती है

समय है
अभी भी संभल पाने का
अगर सुख की लालसा में
मुझे बढ़ाओगे
सच कहता हूं
मां कसम, मुँह की खाओगे
मुँह की खाओगे
**



प्रदूषण, मानव, दानव, बेटा, विज्ञान, माँ, अग्रज

तजुर्बा Tazurba





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तजुर्बा

तजुर्बो भरी दुनिया में,
हर मोड़ पर तजुर्बा मिलता है
अगर तजुर्बो को समझे तो
फूलों में फूल खिलता है

खिल उठता है उपवन उपवन
महक उठता है तन और मन
तेज बढ़ता है सूर्य की भांति
पवन फैलाती है, उसकी ख्याति

खुशियां बैठी रहती है सदा
उनकी राह में
जो सदा कर्म करता है
कर्म की चाह में

अनुभव होता चला जाता है
जिंदगी का
जब हर मोड़ पर तजुर्बा मिलता है
अगर कोई तजुर्बो को समझे
तो फूलों में फूल खिलता है
फूलों में फूल खिलता है.....
...


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