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हाल-ए-दिल Hal-e-dil



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हाल-ए-दिल

दिल की हर बात लोगों को क्यों, नजर आती है
मैं तो कुछ कहता नहीं फिर क्यों, मेरी नजर गाती है
कहने सुनने की बात दूर है
बाकी हाले दिल मेरी ग़ज़ल गाती है

ना जाने सूरत उसकी चारों ओर क्यों, नजर आती है
कुछ भी भाता नहीं मन को क्यों, बस उसकी अदा भाती है
अंदाज बयां करना, बात दूर है
बाकी हाले दिल मेरी ग़ज़ल गाती है

बस अब यही लब पर दुआ आती है
खुदा हर खुशी दे उनको यही मेरी पजल गाती है
क्या-क्या माँगू उनके लिए
बाकी हाले दिल मेरी ग़ज़ल आती है


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