बरसाना व गोवर्धन परिक्रमा, श्री भवानी PG कॉलेज जयपुर

बरसाना व गोवर्धन परिक्रमा, श्री भवानी PG कॉलेज जयपुर


 

भवानी के आंचल से 

राधे राधे करता मैं निकला 

बोलो जय भवानी .........


सबको नचाने वाले को जो अपने इशारों पर नाचती है 

उन श्री राधे रानी को रिझाना था 

इसलिए बन-ठन के आना था 


बालों की काली डाई ने शायद इनका मन जीता था 

इसलिए बालों पर दो-तीन का ध्यान खींचा था 

मैं समझ गया कि जो कृपा अटक रही है 

बरसाने वाले की कृपा से बरस रही है 

बोलो जय भवानी ................


बस में रत्नाकर सा प्रेम छलक रहा था 

गालों को छूकर राधे कहना, माँ सा लग रहा था 

हम सब राधेश्याम के दर्शनों को जा रहे थे।

और आप सब मे कान्हा जी के दर्शन पा रहे थे।

बोलो जय भवानी .........


प्रिंसिपल सर की अनाउंसमेंट और अंत में स्माइल, दो धारी सी लगती थी 

कुछ कहे बिना ही मर जाए, इतनी प्यारी लगती थी 


बस की एक कोयल ऐसा गाना गाती थी 

सब नाचे, झूमे ऐसा गान सुनाती थी 

एक सुनाया दो सुनाया और इतना सुनाया 

की और नही सुहाती थी

लेकिन कुछ भी बोलो, गाना अच्छा गाती थी


इतने में राजा जी ने माइक लेकर सब का मन हर्षाया था 

नाम ले-लेकर सबका बैण्ड बजाया था 


उसे दिन मैंने जाना 

यह भेद में भेद नहीं करते है, 

सार्वजनिक रूप से मज़े लेते हैं

इनसे बचकर रहना है 

वरना मौका मिलते ही जय भवानी कर देते हैं 


बांसुरी की रेमेडी मैने भी अपनाई है 

ठाकुर जी का आशीष मिला, मैंने भी मन्नत पाई है 


हिंदी कॉमर्स के टीचर होकर क्या खूब इतिहास बताए हैं 

गोविन्द देव जी ही है ठाकुर जी, और कैसे जयपुर आए हैं 

जयपुर का होकर भी, मालूम नही था

धन्य है संग इनको पाकर, इतना मस्त इतिहास बताये है



हम सब अपनी राधा को छोड़, कान्हा की राधा से मिलने आये थे

लेकिन एक ही सज्जन ऐसे थे, जो अपनी राधा भी संग में लाये थे।


आप सर कूल रहते, और नाचते बड़े ही प्यारा है 

छीपा सर चाहे शांत खड़े हो, पर ध्यान उन्हें भी सारा है 

भवानी जी के दर्शन पाकर, पहले भवानी जी भागे थे 

हम सभी साथ खड़े थे पर राजा जी सबसे आगे थे 


बस चेंज होगी, आदेश पाकर 

शक्ति बन्ना में ना जाने कौन सी शक्ति ने प्रवेश पाया था 

मां भवानी की लपटों से सबका लगेज बचाया था 


मेहमान नवाजी फिजिक्स से सीखे, सबको इनका भाव भाया था।

भवानी मां गुस्से में, और उनको खूब पानी पिलाया था 


राधे जी की कृपा देखो मिलने की सब में इच्छा छाई थी 

दूसरी बस भरी थी खचाखच, फिर भी पूरी भवानी समाई थी 


बरसाने में राधे जी का सबने दर्शन लाभ उठाया था 

मनसा देवी तक परिक्रमा कर, मैं भी कैसे जैसे आया था 


परिक्रमा पूर्ण हुई, सुनकर मेरा मन हर्षाया था 

फिर "गोपिका जी" के यहां सबने खाना खाया था

बैजण की मिक्सी रोटी का स्वाद निराला था

भूख लग रही थी इतनी कि

सामने पड़ा रायता भी लगता, अमृत का प्याला था


अंत में वापसी का फरमान था आया 

सरकारी बस में भी बर्थडे मनाया 

भवानी के लाल ऐसे छा रहे थे 

कि दूसरे पैसेंजर भी हैप्पी बर्थडे गा रहे थे 


फीडबैक जिसने पूछा वह थी मैम हिमानी

और जो हर मुश्किल में भी आनंद कर ले ऐसी है टीम भवानी

जय हो टीम भवानी, जय हो टीम भवानी